कुर्सीनामा
- गोरख पाण्डेय 1 जब तक वह ज़मीन पर थाकुर्सी बुरी थीजा बैठा जब कुर्सी पर वहज़मीन बुरी हो गई ।2 उसकी नज़र कुर्सी पर लगी थीकुर्सी लग गयी थीउसकी नज़र कोउसको नज़रबन्द करती है कुर्सीजो औरों कोनज़रबन्द करता है ।3 महज ढाँचा नहीं हैलोहे या काठ काकद है...
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सौरभ के.स्वतंत्र
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[11 Jun 2010 22:50 PM]



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