देवदूत नहीं है मनुष्य ....!

क्वचिदन्यतोअपि..........! इसमें कोई संदेह नहीं कि मनुष्य प्रकृति की एक सुन्दरतम संरचना है -मगर वह देवदूत है ऐसा नहीं माना जाना चाहिए!  वह स्वर्ग से अवतरित कोई फ़रिश्ता नहीं बल्कि करोड़ों वर्षों के जैविक विकास से उद्भूत एक सामाजिक और 'सांस्कृतिक ' पशु ही है -जब यह बात १५० वर्ष... [पूरी पोस्ट]
writer Arvind Mishra
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[11 Jun 2010 22:49 PM]

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