क्या होगा चौथा स्तंभ न हो तो?
जरा सोचिए किसी दिन आप नींद से जागे और सामने अखबार न हो...टीवी पर मनोरंजक कार्यक्रम तो दिखाए जा रहे हों... लेकिन उनमें न्यूज चैनल नदारद हो...एक दिन तो चलो जैसे-तैसे गुजर जाएगा..लेकिन अगर ये सिलसिला लगातार जारी रहे तो...!क्या कभी सोचा है...मीडिया की भूमिका...
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Madhu chaurasia, journalist
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[11 Jun 2010 21:44 PM]



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