शतरंज की बाज़ी

निशांत का हिंदीज़ेन ब्लॉग एक युवक ने किसी ईसाई मठ के महंत से कहा – “मैं साधू बनना चाहता हूँ लेकिन मुझे कुछ नहीं आता. मेरे पिता ने मुझे शतरंज खेलना सिखाया था लेकिन शतरंज से मुक्ति तो नहीं मिलती. और जो दूसरी बात मैं जानता हूँ वह यह है कि सभी प्रकार के आमोद-प्रमोद के... [पूरी पोस्ट]
writer Nishant

अनुशासनकरुणाविविध कथाएँ

views
14
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
7
[11 Jun 2010 21:30 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix