कटी कटी रे दाढ़ी उसकी
सुनी तो उसने कभी किसी की नहीं न माँ बाप की न अध्यापकों की न बुजुर्गों की न यार दोस्तों की अपनी ही मर्जी का मालिक रहा| लाख दुनिया कहे नहीं बनाई तो नहीं ही बनाई दाढ़ी शादी भी उसकी मनमौजी हरकतों पर रोक न लगा पायी अपनी मर्जी से बना ली तो बना ली [...]...
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स्वार्थ
poetrychildfatherhabits
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[11 Jun 2010 21:15 PM]



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