आज भी उसे इंतज़ार है .. !

एस.एम. बेहद खुश थी...बारटैंडर ने वोडका का तीसरा गिलास उसके सामने रख दिया था... तीसरे गिलास के बाद न पीने का वादा मन ही मन किया...लज़ानिया ठंडा हो चुका था...उसने काँटे से एक टुकड़ा काटना चाहा लेकिन चीज़ का लम्बा धागा खिंचता चला गया और उसने उसे वापिस प्लेट... [पूरी पोस्ट]
writer मीनाक्षी
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[11 Jun 2010 17:52 PM]

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