हीलियम के हम ग़ुब्बारे
काँच,कीलें,पिन नुकीले,धूर्त धरती,छत,दीवारें
जल रहे धू-धू अंगारे,हीलियम के हम ग़ुब्बारे;
सब हमें ही ताकते हैं,साधते हम पर निशाना,
वो ज़माना लद गया , आसान था जब पार पाना,
जन्म से वो 'खल' मैं 'नायक' , वो 'कमीने' हम 'बेचारे',
जल रहे धू-धू अंगारे,हीलियम के हम...
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RUPAK_REWA
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[11 Jun 2010 17:10 PM]



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