आंगन में पंछी आए ख्वाब सजाने को

मोहन का मन आंगन में पंछी आए ख्वाब सजाने कोआँखों में सपने लाये ,कुछ कर दिखाने कोकुछ सपने पीछे छूटे पलकों पे आंसू बनकेकुछ अपने पीछे छूटे पलकों पे आंसू बनकेकुछ ख्वाब झांकते हैं आँखों में मोती बनकेकुछ वादे अपनों के हैं ,कुछ वादे अपने सेकल दुनिया महकेगी फूल जो आज खिलने... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन वशिष्‍ठ 9991428447
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[11 Jun 2010 14:31 PM]

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