मैनें अपने कल को देखा....
मैनें अपने कल को देखाउन्मादित सपनों के छल सेआहत था झुठलाये सच सेतृष्णा की परछाई से,उसको मैने लड़ते देखामैने अपने कल को देखावर्त्तमान से जो कुछ पायाउससे लगता था घबडायाबीते कल की ओर पलट कर,जाने की कोशिश में देखामैने अपने कल को देखाजीवन-मरण संधि रेखा परराह...
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vikram7
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[11 Jun 2010 13:13 PM]



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