....तो आएगी किस दिन क़यामत पता हो
ग़ज़ल क्यूं करते हैं मेहनत ये नीयत पता हो बीमारों की असली तबीयत पता होतुम्हे गर मेरे सच की जुर्रत पता होतो आएगी किस दिन क़यामत पता होपिता सर पे, पलकों पे माँ को रखेंगेबशत्र्ते कि उनकी वसीयत पता होक्या तोड़ोगे आईना, कुचलोगे चेहरा?करोगे भी क्या गर हक़ीकत पता...
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संजय ग्रोवर Sanjay Grover
व्यंग्य
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[11 Jun 2010 12:50 PM]



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