जवाब चाहता हूं मैं
कहानी की तरह हूं..पानी की तरह हूंचाहता हूं...छुपाना खुद को..पल भर की जवानी की तरह हूंखोजता हूं खुद को...लेकिन खो जाता हूं..लगता है रेगिस्तान में मृग की तरह हूंवक्त के साथ बदलना चाहता हूं लेकिन समय थमता नहीं लिखता हूं ..मिटाता हूंचाहता हूं..छुपाता हूं खुद...
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acharyakeshav
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[11 Jun 2010 11:17 AM]



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