हुस्न की तारीफ़ भी इक फन है...
ये चांदनी रूखे-रौशन से आती है या तुम्हारे पैराहन से आती हैसितारों का नूर तुम पर बरसता है दिल में आवाज़ यहाँ छन से आती है उसी खुशबू से मुअत्तर हैं जुल्फें जो उरूसे शब के बदन से आती है तुम्हारा अक्स दिल में जब उभरता है रौशनी याद के रौज़न से आती है हुस्न की...
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हिमांशु बाजपेयी
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[11 Jun 2010 10:41 AM]



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