मेरी किताबें…
आज न जाने कैसे मुझे उन धूल खाती किताबों की याद आ गयी, जिन्हें कई बरस पहले अपने सिरहाने रख कर सो जाता था। उन किताबों की खुशबू मुझे आज तक याद है, जब अचानक बिजली चली जाती थी और उन खुली किताबों से मुँह को ढकते हुए बिजली आने का...
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Manish
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[11 Jun 2010 10:26 AM]



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