भोपाल !

अंधड़ ! छवि गुगुल से साभारवो अशुभ काली रात उनकी, राह में मौत पसर गई,लाशों के कफ़न बेच कुछ की जिन्दगी बसर गई! जो त्रासदी में बच गए वे,अपंग देह का बोझ ढ़ोकर,न्याय पाने की उम्मीद में, सदी चौथाई गुजर गई! क़ानून, न्याय-व्यवस्था के वो बन फिरते है रहनुमा,इंसाफ का दम भरने... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

bhopal-genocide

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[11 Jun 2010 09:05 AM]

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