विवाह समारोहों में क्या कभी आपने इन्हे देखा है ?

कवि कोकास यह विवाहों का मौसम है । जहाँ से गुज़रो शहनाई बजती सुनाई देती है । जिनका विवाह हो रहा है वे भी प्रसन्न हैं और साथ ही उनके माता पिता भी ,कि चलो एक ज़िम्मेदारी पूरी हो गई । पता नहीं कब तक हमारे यहाँ बच्चों के विवाह को माता पिता अपनी ज़िम्मेदारी समझते रहेंगे ।... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास

अधेड़ होती लड़कियाँ

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[11 Jun 2010 08:58 AM]

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