हे, ईश्वर कहाँ हो तुम
(सुनील)चल ऐ मन इस शहर से दूर चलथक चुका है तन इस शहर से दूर चलक्या कहें, किसको कहें, कैसे करें दर्द बयांमहंगाई ने इस कदर मारा है मुझकोअब तो रोटी का भी हमसे नाता टूट चुका हैबड़े अरमां से आये थे इस इस शहर मेंछोटा सा अशियाँ बनाने कोमगर गिरवी रख चुका हूँ, तन...
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सुनील वाणी
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[11 Jun 2010 08:50 AM]



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