पोस्टरों पर कविताएं

बिगुल जिन दिनों पोस्टरों पर कविताएं लिखी जा रही थी उन दिनों कम शब्दों में सीधी बात कहने की एक परम्परा सी चल पड़ी थी। ऐसा नहीं है कि लेखकों के एक बड़े वर्ग ने या यूं कहें काफी हाउस में काली काफी पर सिगरेट की राख झाड़ने वाले लेखकों ने पोस्टर कविताओं पर विमर्श... [पूरी पोस्ट]
writer राजकुमार सोनी
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[11 Jun 2010 07:34 AM]

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