अर्जुन दादा बोलते थमकर सदा सटीक
अर्जुन दादा बोलते थमकर सदा सटीककेवल अपने कथ्य ही मानें हरदम ठीकमानें हरदम ठीक, नजरिया निजी अनूठा'साथी' जो कुछ कहें उसे बतलाएं झूठादिव्यदृष्टि इसलिए 'सही' अवसर बोलेंगेएंडरसन के 'अतिथि' भेद सगरे खोलेंगे...
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दिव्यदृष्टि
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[11 Jun 2010 07:41 AM]



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