सारंगा तेरी याद में..

azdak हंसी-मज़ाक की बतकही देखते-देखते तीखे झगड़े में बदल गई थी. ऑडिसियस (किताब उसी के हाथ में थी) ऊपर हवा में किताब लहराता भावुक होकर चीख रहा था, ‘आप भूलिए मत, अदम ग़ुलाम नहीं थे! उनकी तबियत हुई, चीन गए. लोकतंत्र व्‍यक्ति के विचार को ही नहीं, उसकी भौतिक गति का... [पूरी पोस्ट]
writer Pramod Singh

साहित्यिक झोला

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[11 Jun 2010 05:32 AM]

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