साहित्य की एक सरल भावुक समझ
प्रार्थना एक पवित्र अपेक्षा होती है.एक ऐसी निश्छल कामना जो उपजती तो अपनी असमर्थता से है लेकिन बहुत ताक़तवर होती है.जब भी बुराई हारी है वह वास्तव में प्रार्थना की जीत थी.मैं जब भी यह श्लोक गुनगुनाता हूँ-सर्वे भवन्तु सुखिन:/सर्वे सन्तु निरामया:/सर्वे...
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शशिभूषण
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[11 Jun 2010 05:08 AM]



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