तूफ़ान [कविता] - अवनीश तिवारी
हर सुहानी शाम तुम्हारी यादों का तूफ़ान उठ मेरे दिमाग से दिल में उतरता है ढलते सूरज के साथ साथ थम सा जाता है| रात की चांदनी में सिहर तैरता है मेरी आँखों में तुम्हारी तस्वीर बन तुम्हारा - मेरा मिलन मुझे नव जीवन दे जाता है| अतिरिक्त......
[पूरी पोस्ट]
12
1
0
1
0
[11 Jun 2010 03:30 AM]



Shuffle








