यह कैसा रिश्ता ?
मै और तारा आसमान में लाखों तारे पर एक ही तारा मुझको भाया |और टूटा वह, एक ही तारा ,जो मेरी किस्मत में आया | चलो मान ही लेता हूँ मै ,यह मेरी किस्मत में लिखा हुआ था |मगर फिर क्या दोष था उसका , जो आसमान में में सजा हुआ था |हम दोनों की एक ही किस्मत...
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Sunil Kumar
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[11 Jun 2010 03:57 AM]



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