हे पंगेच्छु ब्लागर !!!

कुछ ईधर की, कुछ उधर की हे पंगेच्छु ब्लागर! तुम्हारे अंतस का ब्लागर कीटनित्य नए पंगें का सृ्जन करता हैऔर करता है रूप बदल नित्य नईं बकवास.....नैट पर आते ही अपने मन कीमलिनता रूपी गधे पर सवार होप्रस्थित हो जाते हो  तुमकिसी नए पंगें की खोज में....और पंगों के नित्य नवीनप्रयोग... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
views
89
upvote
9
downvote
1
rating
8
comments
27
[11 Jun 2010 03:46 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix