कल और आज

मेरा प्रिय काव्य संकलन  -  My Favourite Hindi Poetry Collection अभी कल तकगालियाँ देते तुम्हेंहताश खेतिहर,अभी कल तकधूल में नहाते थेगोरैयों के झुंड,अभी कल तकपथराई हुई थ‍ीधनहर खेतों की माटी,अभी कल तकधरती की कोख मेंदुबके पेड़ थे मेंढक,अभी कल तकउदास और बदरंग था आसमान!और आजऊपर-ही-ऊपर तन गए हैंतम्हारे तंबू,और आजछमका रही है... [पूरी पोस्ट]
writer Sudeep Dube

kavita

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[11 Jun 2010 01:54 AM]

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