दिल का दर्पण - परावर्तन
मुझे याद रखना कि भूल जाना तुममेरी दुनिया तुम्हीं और जमाना तुमजैसे शाम होते परिन्दे लौटते हैं घरहो सके किसी दिन लौट आना तुम...
[पूरी पोस्ट]
मोहिन्दर कुमार
13
1
0
1
5
[11 Jun 2010 02:45 AM]



Shuffle








