चिरमिलन हो चिरंतन
अधरों से अधरधड़कता वक्ष सीने सेकपोल कपोलों सेमिले,.....।भर गई नासापुटों में, साँसों की गरमाई,आँखों से लाज के हरसिंगार झरे....।कान तक कपोलहो गए रतनार.....।श्यामवर्णी केशों में घूमतीऊँगलियों नेस्वाद जानाप्यार का....।शरबती आँखों सेछलक गईढेर सारी शराबतृप्त...
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डॉ. राजेश नीरव
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[10 Jun 2010 23:24 PM]



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