द्वार पर ही अटके गये
सत्य का किलाजिसके कई द्वारहरेक द्वार है एक श्रद्धा स्थानजहाँ से गुजरकर अन्दरसत्य तक पहुँचना हैहम सब द्वार पर ही अटक गये हैंद्वार को ही सत्य मान बैठें हैंहम हिन्दू बने, मुस्लिम बने,आस्तिक बने, नास्तिक बने,पर धार्मिक न बन पाएद्वार पर ही अटक...
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Arun Khadilkar
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[10 Jun 2010 22:03 PM]



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