'मिलकर जुदा हुए तो '

गुनगुनाती धूप.. शायर क़तील शिफाई की एक ग़ज़ल-------------------------मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हमएक दूसरे की याद में रोया करेंगे हमआंसू छलक छलक के सताएंगे रात भरमोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हमजब दूरियों की आग दिलों को जलाएगीजिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हमगर... [पूरी पोस्ट]
writer अल्पना वर्मा

non filmi

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[10 Jun 2010 20:41 PM]

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