......बचपन (माँ की गोद में)
खट्टी मीठी जिंदगी के टेढ़े मेढ़े रास्तों पर, मीठे मीठे सपनो की बात ही न्यारी है/जिंदगी के साथ साथ जनम लेते हैं सपने,सपनो के साथ चलती जिंदगी हमारी है/जीवन का पहला साल, सपनो से मालामाल, माँ की गोद मीठी मीठी लोरिया सुनाती है/बच्चे के साथ, बच्चा बन जाती है...
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pawan dhiman
जीवन चक्र
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[10 Jun 2010 19:24 PM]



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