सूरज बन मुस्काऊँ : अक्षिता पाखी के चित्रों के साथ रावेंद्रकुमार रवि का नया शिशुगीत

सरस पायस सूरज बन मुस्काऊँमैंने चित्र बनाए सुंदर,आओ, तुम्हें दिखाऊँ!इन्हें बनाकर ख़ुश होता है,मेरा मन, मैं गाऊँ!तोता लटका है बादल से,देखे सूरज नीला!खरबूजा भी लुढ़क रहा है,आसमान में पीला!चूहा, हाथी, फूल हँस रहे,मैं भी सबको भाऊँ!मैंने चित्र बनाए ... ... .गुड्डा मेरा... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि

शिशुगीत

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[10 Jun 2010 14:31 PM]

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