गजल
मुहब्बत एक जज्बा है, पैगाम आने भी दो ।अगर तुम तलाश चुके, एक मौका हमें भी दो ॥समुद्र में उठ्ती लहरें , छेड़ जाती हैं अकसर ।खामोशी से तलाश कर, कुछ मोती हमें भी दो ।।न होती यह मय की दुनियां, तो तुम क्या होते ।सबक किसी से कर हांसिल, कुछ जवाब हमें भी दो॥टूटे...
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Deepak Kumar
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[10 Jun 2010 13:35 PM]



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