किन्नर और हम...अंतर क्या???

दिल की कलम से... शुरुआत में किसी का कुछ दर्द रखने का प्रयास किया और अंत की पंक्ति में अपने दिल का दर्द रखने का प्रयास किया.... अगर किसी को ठेस पहुंचे तो मैं क्षमा चाहूँगा.... मिला एक शारीरिक विसंगति रूपी श्राप...उनका जन्म लेना ही है बन जाता इक पाप...कर्कश बजती तालियाँ और... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप
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[10 Jun 2010 13:17 PM]

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