सुवचन-सुधा

सत्यार्थ-प्रकाश १.)सुखस्य मूलं धर्मः । सुख का मूल(कारण) धर्म है। २.)धर्मस्य मूलमर्थः । धर्म का मूल अर्थ है। ३.)अर्थस्य मूलं राज्यम् । अर्थ का मूल राज्य है। ४.)राज्यमूलमिन्द्रियजयः इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करना ही राज्य का मूल है। ५.)इन्द्रियजयस्य मूलं विनयः ।... [पूरी पोस्ट]
writer सौरभ आत्रेय
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[10 Jun 2010 13:11 PM]

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