छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ...'अदा' की आवाज़...
छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिएये मुनासिब नहीं आदमी के लिएप्यार से भी ज़रूरी कई काम हैंप्यार सब कुछ नहीं ज़िंदगी के लिएतन से तन का मिलन हो न पाया तो क्या -२मन से मन का मिलन कोई कम तो नहींखुशबू आती रहे दूर से ही सहीसामने हो चमन कोई कम तो नहींचाँद मिलता...
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'अदा'
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[10 Jun 2010 12:32 PM]



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