भीग जाती थी तेरी आँखें...!!!
भीग जाती थी तेरी आँखें, मुझे याद करके , तब क्यों न देखा !तुमने मुझे जी भर के ॥ जब सामने थी तो न ,टिक सकी ये मुझ पर , अब क्यूँ करती हैं शिकवा, ये रह -रह करके ॥ इनकी उल्फत का न कोई ,सानी है इस जहाँ में , बसाये रखती हैं ये यादें ,अपने में मर करके ॥ कौन समझे...
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कमलेश वर्मा
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[10 Jun 2010 12:07 PM]



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