रोहतांग : कुछ कबाड़, कुछ छवियाँ
पूरे सत्रह दिन की हाड़तोड़ यात्रा के बाद कल अपने बसेरे पर लौटा हूँ. २३ मई की सुबह घर से निकलना हुआ था और ९ जून की सुबह फिर से अपने द्वार पर. यह एक अध्ययन- यात्रा तो थी ही, विशुद्ध घुमक्कड़ी और आत्मीय पारिवारिक प्रसंग भी इससे जुड़ा हुआ था. इस बीच प्रकृति के...
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sidheshwer
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[10 Jun 2010 11:54 AM]



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