ग़ज़ल: वक्त

अशोकनामा Shareबेवफ़ाई पे जब भी आता हैवक्त तेरी तरह मुस्कराता हैमेरे पर काटना वही चाहेगाउड़ना जो अभी सिखाता हैबातें करना उसे पसंद नहींख़ामोश रहो तो रूठ जाता हैसिखाता बातों की है बाज़ीगरीवादे करके मुकर वो जाता हैमेरी उम्र के सभी सफे लेकरखुद लिखता है खुद मिटाता... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक जमनानी

होशंगाबाद

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[10 Jun 2010 11:42 AM]

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