न अगाड़ी न पिछाड़ी ... उफ्फ !! ये नई गाड़ी (लघुकथा)
मार साले को .... अबे तेरे बाप की गाड़ी है जो खरोच मार दिया. पकड़ लो साले को ! और मैं भी नई चमचमाती गाड़ी को देखने लगा. खरोंच को भी देखने की जिज्ञासा हुई. पूरी गाड़ी देखा पर खरोंच नजर नही आई. उधर उस आटो चालक को पकड़ कर पीटने का भी कार्यक्रम शुरू हो चुका था....
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M VERMA
लघुकथा
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[10 Jun 2010 11:00 AM]



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