खामोशियों की जुबाँ समझे तो मायने बदल जाते है बातो के.....(कुंवर जी)
खामोशियों की जुबाँ समझेतो मायने बदल जाते है बातो के,असमंजस में है कि बातों के मायने बदलेया बात पुरानी रहने दे....जिस्मानी जुबाँ का अंदाज-ए-बयाँ तोकुछ और ही अफसाना कह रहा,अच्छा लगे तो मान ले वरनाअफसानात रूहानी रहने दे,हौंसले अपने तो पस्त...
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kunwarji's
(कविता)
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[10 Jun 2010 08:32 AM]



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