हम डंडे के पीर हैं.
समाचार को पढ़ने के लिए इस पर क्लिक करेंसूखा पड़ता है तो हम लाओ-लाओ चिल्लाते हैं, बाढ़ आती है तो बचाओ-बचाओ. लेकिन हम सीखने से तब तक इन्कार करते रहते हैं जब तक कोई और चारा ही न बचे. अब ऊपर के समाचार को ही देख लीजिए, देश में अधिकांश जगह पानी का यही हाल है...
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राम लाल
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[10 Jun 2010 08:20 AM]



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