लो क सं घ र्ष !: आर्थिक जीवन और अहिंसा -3
मानवीय प्रगति का लम्बा इतिहास काफी अंशों तक और कई अर्थों में स्वैच्छिक एवं स्वतंत्र वरण-चयन के प्रयासों का इतिहास हैं। फलतः ऐसे सहज स्वतंत्र सामाजिक जीवन को सर्व-संगत, सर्व-सुलभ, जन-जन का अमिट और अक्षुण्य अधिकार माना जा सकता है। अधिकार के रूप में...
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Suman
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[10 Jun 2010 08:09 AM]



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