“ऊष्म और संयुक्ताक्षर” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
“ष” “ष” से बन जाता षटकोण! षड्दर्शन, षड्दृष्टिकोण! षट्-विद्याओं को धारणकर, बन जाओ अर्जुन और द्रोण!! “श” “श” से शंकर हैं भगवान! शम्भू जी हैं कृपानिधान! खाओ शहद, शरीफा मीठा, कभी न कहलाना शैतान!! “स” “स” से संविधान, सरकार, संसद में...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
कविता
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[10 Jun 2010 08:07 AM]



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