फिर भी...
क्यूँ हो रहा है ऐसामेरी मुस्कुराहट हल्की हो गई है ख्वाब कुछ संजीदा से हो गए हैंआँखों में अकेलेपन की नदी बहने लगी है...यूँ मैंने प्यार की पाल खोल दी हैतूफ़ान का शोर ना हो व्यवधान न हो !और तो औरदुआओं का धागा भी अदृश्य को बाँधा हैफिर भी...फिर भी ख्वाब कुछ...
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रश्मि प्रभा...
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[10 Jun 2010 07:32 AM]



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