कैसे कोई मेहनत की रोटी खाए!
सुनील उपायदुःखों का अंबार है, आसूंओं की धार है,क्या हम गरीबों की जिंदगी, जानवरों से भी बेकार है।बडी-बडी समस्याओं से हम हमेशा रूबरू होते हैं। मीडिया, न्यूज पोर्टल, ब्लॉग हर जगह इनकी चर्चा होती है। उन्हीं मुद्दों में कुछ ऐसे अनछुए पहलू रह जाते हैं, जिनसे...
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सुनील वाणी
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[10 Jun 2010 05:22 AM]



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