लो क सं घ र्ष !: रात गंवाई जाग कर, दिवस गवायों सोय

KABEERA KHADA BAZAR MEIN सुख, दुख, हर्ष, विषाद को व्यक्त करने का अधिकार सभी को है, परन्तु इनके लिये कुछ शर्तें हैं, कुछ शिष्टाचार हैं। आजकल शादी विवाह एँव अन्य अवसरों पर ‘हर्ष-फायरिंग‘ का बड़ा प्रचलन हैं। यह स्टेटस- सिंबल बन गया है। परन्तु ऐसा क्या हर्ष जो दूसरों के दुख का कारण... [पूरी पोस्ट]
writer Suman
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[10 Jun 2010 05:07 AM]

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