हवा हुआ रोमांच
10वीं और 12वीं – दोनों के ही नतीजे डाक से स्कूल पहुंचे थे। उस दिन मंदिर होते हुए स्कूल पहुंचे तो उत्साह चरम पर था। उंगली से एक-एक विषय पर हाथ रखते हुए मार्क्स नोट किए थे,तब भी डर बना था कि ऊपर या नीचे वाले के नंबर न लिख बैठें। साल दल साल स्कूलों में...
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डॉ वर्तिका नन्दा
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[10 Jun 2010 04:00 AM]



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