किसी से कोई क्यों कम हो [गज़ल] - प्राण ...

साहित्यशिल्पी.इन किसी के सामने खामोश बनके कोई क्यों नम हो जमाने में मेरे रामा किसी से कोई क्यों कम हो कफ़न में लाश है इक शख्स की लेकिन बिना सर के किसी की ज़िन्दगी का अंत ऐसा भी न निर्मम हो अतिरिक्त...... [पूरी पोस्ट]
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[10 Jun 2010 03:30 AM]

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