वे पहले रेलवे में स्टेनों थीं, बाद में चीफ जस्टिस बनीं
उमेश चतुर्वेदी ♦ विक्रम सेठ की मां लीला सेठ की "घर और अदालत" नाम से आयी यह आत्मकथा छह साल पहले अंग्रेजी में ऑन बैलेंस के नाम से प्रकाशित हो चुकी है। तब इसे अंग्रेजी में हाथोंहाथ लिया गया था। लेकिन अदालती नियुक्तियों की राजनीति से हिंदी पाठकों का...
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अविनाश
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[10 Jun 2010 03:13 AM]



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