विरह गीत !

अंधड़ ! छवि गूगल से साभारमीत तुम कब आओगे,कब तक यूं तडपाओगे,जान बाकी है,अरमान बाकी है,पास कब बुलाओगे,मीत तुम कब आओगे !झुठलाओ न मुझे,झूठे वादों की तरह,ये नयन झरते हैसावन-भादों की तरह,कब तक यूं सताओगे,मीत तुम कब आओगे !!दिल में आस है,मन मेरा उदास है,क्या तुम्हे भीयह... [पूरी पोस्ट]
writer पी.सी.गोदियाल

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[09 Jun 2010 21:58 PM]

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