फिर भी बनाऊँगी मैं, एक नशेमन हवाओं में........
मेरे इश्क का जुनूँ,रक्स करता है फिजाओं में, तेरे फ़रेब मसलते हैं मुझेमेरे ही ग़म की छाँव में, हर साँस से उलझती हैहर लम्हा ज़िन्दगी की, लिपटती जाती है देखोउम्र की ज़ंजीर पाँव में, ये पागलपन मेरा, बरामद करवाएगा मुझे,कब तक छुपूँगी कहो सदियों...
[पूरी पोस्ट]
'अदा'
71
9
1
8
27
[09 Jun 2010 22:06 PM]



Shuffle








